Monday, 8 April 2013

मेरी बेटी ... dedicated to my daughter

मेरी बेटी ...

जीवन के सोपान मिले , मन मंदिर को अरमान मिले ...
जब जीवन में आई नन्ही कली , सातो आसमान मिले ....
यूँ बीता एक बरस संग उसके , लगे प्रीत-पकवान मिले |
उसके हर एक रूप रंग में , मुझको मेरे भगवान् मिले ||

चलती लप-झप हिलती-दुलती , आकर मुझसे हँसकर मिलती ...
अनजान शब्द की गुनगुन , कानो में मधुरस सी घुलती ...
जबसे पाया है अंक सृजन पर , सौभाग्य मिले यशगान मिले |
मेरे मधुबन के कण कण को , खुशियों के संज्ञान मिले ||

--- कविराज तरुण 

1 comment:

  1. बेहतरीन सुन्दर प्रस्तुति,आभार.कमेंट्स में वर्ड वेरिफिकेसन हटा लें.

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