Friday, 13 February 2026

वक़्त बदल भी सकता है

छोटी आंखों में अंबर सा सपना पल भी सकता है 
आज नहीं है कुछ भी, तो क्या, वक्त बदल भी सकता है

इक काम पकड़ तू चलता चल, रुकना तेरा काम नहीं
रुका हुआ जो काम है पगले, आगे चल भी सकता है

जगत चराचर जीव अचंभित, कुछ भी तेरे हाथ नही 
डरता क्यों है अनहोनी से, खतरा टल भी सकता है

इतना मुश्किल जो होता, कर पाता कोई और नही
पर्वत के उस पार क्षितिज से, सूर्य निकल भी सकता है

सब में तो भगवान छुपे है, फिर क्या खोजे आज 'तरुण'
नेकी का परिणाम अचानक, तुझको फल भी सकता है

~कविराज तरुण

Monday, 26 January 2026

जागो तभी सबेरा होगा

माना के घनघोर कुहासा 
टूटी है इस मन की आशा 

रात कालिमा लेकर आई 
गहरी काजल सी परछाई 

पर अब दूर अंधेरा होगा 
जागो! तभी सबेरा होगा

तुम दीपक सा जलने वाले 
तुमसे ही उत्पन्न उजाले 

तुम चमके तो जग है चमका 
तुम दमके तो सूरज दमका 

किरणों का फिर डेरा होगा 
जागो! तभी सबेरा होगा

पर उपदेश कुशल बहु तेरे 
पर्वत को जब बादल घेरे 

तब आँखों में स्वप्न सजाये 
पुंज कोई पर्वत पर आये

उसने चित्र उकेरा होगा 
जागो! तभी सबेरा होगा

नयनों में ही विरहा बीते 
आंसूँ का जल पीते पीते 

निज को हमने नही संवारा 
तो फिर अम्बर का ये तारा 

ना मेरा ना तेरा होगा 
जागो! तभी सबेरा होगा

उत्तर क्या दें प्रश्न अधूरा 
जीवन जैसे भाँग धतूरा 

खाये तो बौराना तय है 
या मरने का मन में भय है 

ऐसे नही बसेरा होगा 
जागो! तभी सबेरा होगा

पांच दिन की बैंकिंग

पांच दिन की बैंकिंग स्वीकार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

जो हमारी जान लेने पर उतारू नीति है 
उस नीति का पुरजोर से प्रतिकार होना चाहिए

क्या कहा हमसे नही अब फर्क तुमको पड़ रहा 
क्या कहा ये बैंक वाला फालतू में लड़ रहा 

क्या कहा हमने नही कुछ भी दिया है देश को 
क्या कहा हम लोग केवल आ रहे उपदेश को 

तो तुम्हारी सोच को धिक्कार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

तुम नही आओगे तो फिर कौन आयेगा यहाँ 
बात मन की सामने फिर कौन लायेगा यहाँ 

तुम नही बोलोगे तो आवाज़ कैसे आयेगी 
पांच दिन की बैंकिंग कैसे भला मिल पायेगी 

आवाज़ दो हम एक हैं यलगार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

हम सदा जनतंत्र की सेवा समर्पण में रहे 
नोटबंदी जब हुई तो हम प्रबंधन में रहे 

हम खुशी से कर्म को अपने निभाते ही रहे 
परिवार को भी भूलकर जन धन सजाते ही रहे 

अब बैंक कर्मी का सुखी परिवार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

पांच दिन की बैंकिंग स्वीकार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

Sunday, 25 January 2026

ग़ज़ल - आवारगी को देखकर

हैरान हूँ अपनी जवाँ बे-बस्तगी को देखकर
इस बेखुदी को देखकर, आवारगी को देखकर

दिल फिर किसी पे मर मिटा अपनी हदों को छोड़कर 
समझायें क्या इस उम्र की नादानगी को देखकर

जब हर तरफ हो शोर तो फिर है यही तब लाजिमी 
रुक जाइये थम जाइये अब सादगी को देखकर

सहरा में जैसे प्यास से लड़ता है कोई बावरा 
जीता रहा मै उम्र भर उस तिशनगी को देखकर

आसान है इनके लिए दिल तोडना दिल जोड़ना 
मन भर गया मेरा 'तरुण' इस दिल्लगी को देखकर

Monday, 24 November 2025

रुतबा नही गया

इस दिल से तेरा आज भी रुतबा नहीं गया
तन्हा गया मगर कोई रुसवा नहीं गया

इक प्यार और प्यार की तमआम उम्र में 
मसला यही रहा कि वो बदला नही गया

दो आँख थी दीदार में दोनों लगी रही 
कुछ और हमसे आज भी देखा नही गया

अब इसके बाद प्यार की ताबीर और क्या
होशे दिलो जाने जिगर क्या क्या नही गया

दिल मुत्तली हुआ था तेरे नाम हमसफर
ये आज भी तेरा अभी कब्ज़ा नही गया

Sunday, 28 September 2025

इतना तो आसान नही है

लिपटी है सीने से मेरे, कैसे छोड़ के जाऊँ मै 
पापा-पापा रटती है वो क्या उसको समझाऊं मै

पापा जितने प्यारे हैं उतने तो भगवान नही हैं 
छोड़ के आना बच्चे को इतना तो आसान नही है

जब उसको अपने मन की इच्छा पूरी करवानी हो 
या फिर कोई नया गेम या नई चीज मंगवानी हो
धीमे से कहकर कानों में पढ़ने वो लग जाती है
'पापा सब दिलवायेंगे' ये कहकर वो इतराती है 

अब उसकी इच्छा के आगे मेरा कुछ अरमान नही है 
छोड़ के आना बच्चे को इतना तो आसान नही है

मासूम सवालों से उसने अक्सर ही चौकाया है 
कान्हा ने क्यों चुरा चुरा के माखन इतना खाया है
श्री राधा रानी की सखियां काहें इतनी सारी थीं 
गईया को मुरली की धुन क्यों लगती इतनी प्यारी थी 

इन प्रश्नों का क्या उत्तर दूँ इतना मुझमे ज्ञान नही है 
छोड़ के आना बच्चे को इतना तो आसान नही है

चाहे रात में निकलो लेकिन पापा मुझे उठाकर जाना 
अगली बारी आओगे कब? ये भी ज़रा बताकर जाना
मै मन लगाकर पढ़ती हूँ पापा अच्छे से रहती हूँ 
पर छुट्टी जिस दिन होती है मै राह तुम्हारी तकती हूँ

प्यार छुपा जो बातों में उसका कोई अनुमान नही है 
छोड़ के आना बच्चे को इतना तो आसान नही है

बैंक की किताब दीजिये

मुझको अपने बैंक की किताब दीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये
ब्रांच ब्रांच ज़ख़्मी ये फज़ाएं हो गईं 
बोझ तले सारी इच्छाएं हो गईं 
धीरे धीरे जेब पर सदाएं हो गईं 
कोई तो रिलीफ का ख़िताब दीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये
मुझको अपने बैंक की किताब दीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये

बैठे बैठे लोग हम गरीब हो गए 
हाल चाल ढाल सब अजीब हो गए 
यानी हम मौत के करीब हो गए 
दूर अपने चेहरे से नकाब कीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये
मुझको अपने बैंक की किताब दीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये

आप भला कैसे पी एल आई खा गए 
दूध सारा बेच के मलाई खा गए 
आप तो हमारी ही कमाई खा गए 
लीज़ वाले टैक्स का जवाब दीजिये
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये
मुझको अपने बैंक की किताब दीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये

स्टॉफ धीरे धीरे देखो कम हो गए 
क्लर्क तो जैसे सारे ख़तम हो गए 
यानी बिना हाथ के ही हम हो गए 
फाइव डे की बैंकिंग जनाब दीजिये
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये
मुझको अपने बैंक की किताब दीजिये 
प्रक़्यूजिट पर टैक्स का हिसाब दीजिये

Wednesday, 17 September 2025

घबरा रहा है

सफर ये क्या सफर है रोज बढ़ता जा रहा है 
बिना मंजिल हमारे पाँव से टकरा रहा है 

कभी जो देरतक बैठा हुआ था साथ मेरे 
वो मेरे साथ चलने में बहुत घबरा रहा है

उसे हर बात से कोई तकल्लुफ हो रही है 
वो आँखों से बहुत कुछ आज भी बतला रहा है

उसी के हुस्न के चर्चे सुनाई दे रहे हैं 
उसी का नाम लोगों की जुबाँ पर आ रहा है

उसे ये बेवफाई खूब शोहरत दे रही है 
तरुण तन्हा हुआ तो रोज गाने गा रहा है

Friday, 12 September 2025

आप तो रहने ही दीजिये

दिल का हिसाब आप तो रहने ही दीजिये
अच्छा ख़राब आप तो रहने ही दीजिये

जो पी चुका हो आप के आँखों से जाम को 
उसको शराब आप तो रहने ही दीजिये

मै जानता हूँ आप को बेहद करीब से 
मुंह पर नकाब आप तो रहने ही दीजिये

पढ़ लिख के उम्र बीती है मेरी किताब में
फिर से किताब आप तो रहने ही दीजिये

जो दिल में था वो आपकी आँखों में आ गया 
अब ये गुलाब आप तो रहने ही दीजिये

मालूम है कि आपकी कितनी मजाल है 
सुनिये जनाब आप तो रहने ही दीजिये

लो एक तो बे-आबरू महफिल में आ गए 
उसपर ख़िताब आप तो रहने ही दीजिये

जब आस्तीन में छुपे किरदार हैं 'तरुण'
तो इंकलाब आप तो रहने ही दीजिये

Saturday, 2 August 2025

ग़ज़ल अनमना सा मन मेरा

अनमना सा मन मेरा, जो तुम मनाओ मान जाये
क्यों किसी के दर से कोई रूठकर मेहमान जाये

एक दिल है एक धड़कन एक हैं हम दो नहीं हैं
ये मुझे मालूम है पर तू कभी तो मान जाये

हूँ अकेला दूर मंजिल राह में कांटे बहुत हैं
हार तबतक है नहीं जबतक नहीं अरमान जाये

एक तुम थे साथ मे तो जिंदगी थी साथ मेरे 
खैर! अब तुम जा रहे तो ख़्वाब जायें जान जाये

गीत कविता और गज़लें इसलिए लिखता 'तरुण' है 
क्या पता किस दिन तुम्हारा पंक्तियों पर ध्यान जाये

ग़ज़ल किसी का दिल जो टूटेगा

किसी का दिल जो टूटेगा किसी के काम आयेगा 
कहीं बेचैन रातें और कहीं आराम आयेगा

मुहब्बत के सफर में राह मंजिल दूंढ़ लेती है 
किसी दिन आपके भी नाम से पैगाम आयेगा

हिमाकत कर रहा है दिल तुम्हारे दिल की शोहबत में 
मगर फिर भी निगाहों पर तेरे इल्जाम आयेगा

थकन उसकी मिटाने के लिए कुछ फूल रख लेना 
वो निकला है सुबह लड़ के मगर वो शाम आयेगा

चरागों में मशालों में सितारों में कहीं पर तो
'तरुण' यूँही रही कोशिश तुम्हारा नाम आयेगा

शिव गीत

हर हर महादेव… ओम नमः शिवाय… ओम नमः शिवाय…"

सावन की बूंदें जब बरसें गगन से,
जैसे हर हर गंगे की गूँज धरा पे।
काँवड़ियों का सैलाब राहों पे घूमे ,
शिवालयों में अतिमधुर भजन गूंजे 

बेलपत्र चढ़े शिवलिंग पर, नंदी की घंटियां बजती हैं।
सावन में मेरे भोलेनाथ की सवारी सजती है 

कैलाश की चोटी पे बर्फ सफेद,
जहाँ ध्यान में लीन महादेव।
गंगाधर, नटराज, औघड़ दानी,
आदियोगी है देवों के देव।

तीसरी आंख में जो अग्नि छुपाए,
सृष्टि का हर रहस्य बताए।
वो नीलकंठ विषपान कर के भी,
सबको जीवन का अमृत पिलाए।

महाशिवरात्रि की रात सजती है,
दीप जलते हैं, शंख बजते हैं।
त्रिपुंड माथे पे भस्म रमाए,
कण-कण में शिव के स्वर गूंजते हैं ।

शिव शंकर शम्भू आरती

कंकड़ कंकड़ शंकर है और मै कंकड़ की माटी
कंकड़ कंकड़ शंकर है और मै कंकड़ की माटी 
भोले तेरी लौ से जलती है जीवन की बाती
भोला भाला शिव कैलाशा वाला है रखवाला 
भोला भाला शिव कैलाशा वाला है रखवाला 
डमरू लेकर झूमे बाबा मेरा वो मतवाला

ॐ शिव शंकर शम्भू 

शिव तुम ही रखवाले, तुम ही प्राणप्रिये
प्रभु तुम ही प्राणप्रिये
तुमको जो भी ध्यावे, उसको तार दिये
ॐ शिव शंकर शम्भू

श्रावण मास तुम्हारे, हिय को अति प्यारा
प्रभु हिय को अति प्यारा
भक्त करे जल अर्पण, बोले जयकारा
ॐ शिव शंकर शम्भू

नाद करे जल मारुत, मेघ करे गर्जन
प्रभु मेघ करे गर्जन
विधिवत सृष्टि तुम्हारा, करती है अर्चन
ॐ शिव शंकर शम्भू

नेहभाव से रहते, मूषक बाघ शिखी
प्रभु मूषक बाघ शिखी
धेनु रहे सेवा में, नाग बने कंठी
ॐ शिव शंकर शम्भू

कांवड़ लेकर जाये, भक्त मगन तेरा
प्रभु भक्त मगन तेरा
झूमे नाचे गाये, जहाँ लगे डेरा
ॐ शिव शंकर शम्भू

भोलेनाथ तुम्हारा, जो भी नाम जपे
प्रभु जो भी नाम जपे
संकट उसका कटता, रूठे भाग्य जगे
ॐ शिव शंकर शम्भू

कविराज तरुण

हर हर शंकर दोहे

हर हर शंकर, करुणा सागर, ध्यान धरो मन मौन 
नीलकंठ की महिमा से, यहाँ अपरिचित कौन 

हर हर महादेव, हर हर महादेव 

जटा जूट गंगा बहे, भाल विराजे चंद्र।
आदियोग आसन धरें, जपे मनोहर मंत्र॥

भस्म लगायें अंग पर, भूत भरें दरबार।
महादेव ही कर सकें, दुष्टों का संहार।।

अमरनाथ के नाम से, गूँजित श्रावण मास।
भक्तिभाव से कीजिये, सोमवार उपवास।।

श्रावण मास प्रतीक है, शिव पूजा का काल।
कावड़ियों की फौज से, गंगा हुई निहाल।।

सोमवार का व्रत करें, बेल धतूर चढ़ाय।
ओमकार के जाप से, जीवन ये तर जाय।।

महाकाल के तेज से, उज्जयिनी की शान।
महामृत्युंजय मंत्र से, मिलते हैं भगवान ।।

सोमनाथ भी आप हैं, विश्वनाथ भी आप।
बैधनाथ भी आप हैं, आपहि सब के नाथ।।

अमरनाथ की हो गुफा, शिव जी का हो ध्यान।
इससे ज्यादा कुछ नहीं, मांगूँ मै वरदान।।

Wednesday, 16 July 2025

उपहार

उपहार 

स्नेह की कोमल छाँव में बीते हर एक प्रहर से,
कामना है - आपके जीवन को नित मिलता रहे उपहार।
माँ की ममता, पिता का भरोसा,
भाई का संबल, बहन की हँसी, मित्रों का साथ 
आपको मिलता रहे, इन रिश्तों में छुपा हुआ प्यार ।

प्रेम का आशीष का — न कोई मोल है, न कोई शर्त,
हृदय की गहराईयों से निकलता ये है एक मधुर स्वर।
जो आपको देता रहे उम्मीदों की रौशनी,
हाथ थाम कर कहता रहे कि — "आप अकेले नहीं।"

स्वास्थ्य आपका उत्तम हो और जीवन हो आसान,
हर स्वास में खुशियाँ छेड़े, जीवन का मधुर गान।
कदम कदम पर होता रहे, दुआओं का असर,
चित्त चन्दन-सा शीतल, भाल सूरज-सा प्रखर।

प्रकृति के अनगिनत तोहफ़े, आपका यशगान करें 
नीला अम्बर, बहती नदियाँ, आपका सम्मान करें 
पर्वतों की चुप्पी में शांति का संगीत बनें आप 
बारिश की बूँदों में धरती की प्रीत बनें आप 
हर ऋतु हर दिशा आपका श्रृंगार करे 
पशु, पक्षी, जीव, जगत आपका सत्कार करे 

प्रत्येक सुबह एक नई शुरुआत हो 
प्रत्येक साँझ की मधुर विदाई हो 
कर्म की नई अवधारणा गढ़ो आप 
धर्म में व्याप्त सदभावना धरो आप 
और प्रभु की अनंत करुणा का मिले आपको आगार
कामना है - आपके जीवन को नित मिलता रहे उपहार।

उपहार न केवल वस्तुएँ हैं,
ये भावना हैं, ये संवाद हैं।
हर दिन, हर पल, हर व्यक्ति,
अगर प्रेम से देखा जाए —
तो स्वयं एक सुंदर उपहार हैं।

Monday, 30 June 2025

हो नहीं सकता

देर तक मुझसे ख़फ़ा वो हो नहीं सकता
थी ग़लतफ़हमी मुझे, मैं रो नहीं सकता

फिर बिछड़ने के मुझे अब ख्वाब आएंगे
चार दिन से जग रहा, पर सो नहीं सकता

उसके लहजे में जो छलका था वो पत्थर था
अब किसी उम्मीद पर भी ढो नहीं सकता

आँख नम है पर कोई आँसू नहीं गिरता
दर्द ऐसा है जिसे मैं धो नहीं सकता

जिसके जाने से 'तरुण' वीरान है दुनिया 
था यकीं उसको कभी मै खो नहीं सकता

बदलते हैं

मुश्किलों में हम सफर थोड़ी बदलते हैं 
राह जैसी हो डगर थोड़ी बदलते हैँ

जिनको अपने लोग की परवाह रहती है 
वो परिंदे अपना घर थोड़ी बदलते हैँ

धूप में भी पालते परिवार वो अपना 
देखकर मौसम शहर थोड़ी बदलते हैँ 

जिसकी जो आदत रही वो हो गया वैसा 
सांप कुछ भी हो जहर थोड़ी बदलते हैं

डाल अपनी टहनियों पर फूल आने से
झूम लेते हैं शज़र थोड़ी बदलते हैं

इस बदलते वक़्त में जो लोग जिंदा हैँ 
वो ज़रा सी बात पर थोड़ी बदलते हैँ 

जिसके सर पर हाथ हो बूढ़े बुजुर्गो का
वो कभी अपना हुनर थोड़ी बदलते हैँ 

वो बड़ा मशहूर था जिसने कहा था  ये 
जो खबर खुद हों खबर थोड़ी बदलते हैँ

जब बुलंदी पर किसी के पैर काबिज हों 
तब वहां जाकर नजर थोड़ी बदलते हैँ