तेरे रंग मे ही खुद को रंग लूँ
तेरी यादों को मै अपने संग लूँ ।
दो चुटकी गुलाल की लाली
तेरे माथे पर आजा मै भर दूँ ।
तेरे नयनों का नीला अम्बर
अधरों पर आभास गुलाबी
श्वेत वर्ण की अनुपम रचना
संदेह मात्र भी नही खराबी
हर रंग छुआ मेरे चित्तपटल ने
इन प्यार के रंगों से मै दंग हूँ ।
बिन तेरे होली कैसे होगी अब
भीतर ही भीतर इस बात से तंग हूँ ।
तेरे रंग मे ही खुद को रंग लूँ ।
तेरी यादों को मै अपने संग लूँ ।।
कविराज तरुण