Monday, 2 March 2026

रणभूमि 2

पांच दिन की बैंकिंग स्वीकार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

जो हमारी जान लेने पर उतारू नीति है 
उस नीति का पुरजोर से प्रतिकार होना चाहिए

क्या कहा हमसे नही अब फर्क तुमको पड़ रहा 
क्या कहा ये बैंक वाला फालतू में लड़ रहा 

क्या कहा हमने नही कुछ भी दिया है देश को 
क्या कहा हम लोग केवल आ रहे उपदेश को 

तो तुम्हारी सोच को धिक्कार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

तुम नही आओगे तो फिर कौन आयेगा यहाँ 
बात मन की सामने फिर कौन लायेगा यहाँ 

तुम नही बोलोगे तो आवाज़ कैसे आयेगी 
पांच दिन की बैंकिंग कैसे भला मिल पायेगी 

आवाज़ दो हम एक हैं यलगार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

हम सदा जनतंत्र की सेवा समर्पण में रहे 
नोटबंदी जब हुई तो हम प्रबंधन में रहे 

हम खुशी से कर्म को अपने निभाते ही रहे 
परिवार को भी भूलकर जन धन सजाते ही रहे 

अब बैंक कर्मी का सुखी परिवार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

पांच दिन की बैंकिंग स्वीकार होना चाहिए 
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए

रणभूमि 1

शक्ति के अनुसार परिचय दो जहाँ के सामने
खामोश रहकर कब समझ आयेंगे तेरे मायने
अंगार आँखों मे लिए यलगार होना चाहिए
रणभूमि में शूरवीर ही स्वीकार होना चाहिए


तुम इस घनी काली अमावस में दिया लेकर चलो*
क्यूँ अकेले चल रहे तुम काफिला लेकर चलो
रण जीतने का मंच अब तैयार होना चाहिए
रणभूमि में शूरवीर ही स्वीकार होना चाहिए


अस्तित्व की है ये लड़ाई और है सम्मान की
हाँ ये लड़ाई है हमारे आपके पहचान की
इस बात का हर एक में संचार होना चाहिए
रणभूमि में शूरवीर ही स्वीकार होना चाहिए


जो हमको दबाने के मूड में हैं वो भी सुनें ये गौर से
ये गद्दियां हिल जायेंगी अबकी हमारे शोर से
ऐसे लोगों की सोच पर धिक्कार होना चाहिए
रणभूमि में शूरवीर ही स्वीकार होना चाहिए