हार जाने पर हम भी रब ढूंढ़ते हैं
पास रहते हैं तो जताते नही हैं
दूर जाने पर सब के सब ढूंढ़ते हैं
देखकर उसको दिल कहाँ तक भरेगा
उसके लब को मेरे ये लब ढूंढ़ते हैं
और कुछ पाने को नही इस शहर में
होश आता है जब भी तब ढूंढ़ते हैं
उसकी लत इसतरहा लग गई है 'तरुण' अब
जब भी उठती है ये तलब ढूंढ़ते हैं
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