शहर में साख वालों से, अदावत कर नही सकता
उसे दो जून की रोटी जुटानी है - इसी जिद में
जहर पी ले भले कितना, मगर वो मर नही सकता
उसे ज़िल्लेइलाही के सितम ने यूँ सताया है
कि अब जो मौत भी आये तो बंदा डर नही सकता
वही चमका है दुनिया में सितारों की तरह अक्सर
जिसे सब लोग कहते थे कभी कुछ कर नही सकता
उसे थोड़ी तसल्ली और थोड़ा प्यार दे दो तुम
'तरुण' ये घाव अपने आप तो अब भर नही सकता
©कविराज तरुण