Saturday, 9 May 2026

माखनलाल सरकार जी

पूज्यनीय माखनलाल सरकार 

ढलती हुई उम्र के 
अठानवे पड़ाव में 
एक बच्चे की किलकारियों सी मुस्कान लिए 
जैसे फूल खिल जाता है 
भोर के सूरज में 
जैसे चिड़िया चाहकने लगती हैं
अपने घोंसलें से बाहर आकर 
आप आये हो संघर्ष की कहानी कहने 

वो संघर्ष जो उतना ही आपका है 
जितना हनुमान का था सीता को बचाने में 
जितना श्रीकृष्ण का था यशोदा को पाने में 
वो संघर्ष जिसे 
पूरी जवानी देकर सींचा गया 
और वो भी किसी लालसा के बिना 
केवल उस स्वप्न के लिए 
जो कभी शिवाजी ने 
हिन्दवी स्वराज के लिए देखा था 
जो कभी श्यामा प्रसाद ने 
भारतवर्ष के लिए देखा था 

आप लड़ते लड़ते 
मर भी सकते थे 
जैसे अनेकोनेक योद्धा चल बसे 
पर फिर..
संघर्ष को जीवित कौन रखता 
फिर ये जीती जागती 
कहानी कौन कहता 
कौन बता पाता कि 
निःस्वार्थ प्रेम किसे कहते हैं 
एक कार्यकर्ता की ताकत को 
भला कौन जान पाता 
स्वयं से ज्यादा 
उद्देश्यों की चिंता 
परिणाम से ज्यादा 
परिश्रम को महत्व 
ये कोई आम बात नही 
ये साक्ष्य है 
उस आशा के दीपक का 
जिसकी लौ को आपने जलाये रखा 
आँधियों से तूफानों से

आपकी इस मुस्कान में 
एक इतिहास छुपा है 
साधना का 
समर्पण का 
और इसके लिए 
ना तो जरूरत है 
किसी उपहार की 
ना ही किसी पुरस्कार की 
पर ये जो कंधे पर 
अंगवस्त्र मिला है पंतप्रधान के हाथों 
ये जो नतमस्तक हुए हैं वो 
आपके सम्मान में 
ये जान लीजिये कि उनके साथ 
एक सौ चालीस करोड़ जनता भी 
आपके श्रीचरणों को 
प्रणाम करती है

©कविराज तरुण 
7007789629