Tuesday, 24 September 2024
संशय मुक्तक
संशय की घोर अवस्था में राही कैसा विश्राम
तबतक चल तू जबतक आ जाये ना पूर्ण विराम
नियति नही नियम से आता है उत्तम परिणाम
बस नेक भाव से पूरित कर तू अपना सारा काम
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