Thursday, 3 October 2024

क़त्ल भी होगा इल्जाम भी ना आयेगा

कत्ल भी होगा इल्जाम भी न आयेगा
तुम्हारा हुनर कुछ काम भी न आयेगा

उसके चाहने वालों की लंबी फेरहिस्त में
हमें ये यकीं है तेरा नाम भी न आयेगा

इंतजार में बैठे हो किसके और किसलिए
वो सुबह का भूला अब शाम भी न आयेगा

मान लो ये इश्क तुम्हारे बस का नही
दर्द भी होगा तुम्हे आराम भी न आयेगा

क्यों उसके आने की उम्मीद करें बैठे हो 
तुम देखना उसका पैगाम भी न आयेगा

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