जिस्म से जां निकल जायेगी तब आओगे
आज हवा में ठंड है पहले से कहीं ज्यादा
ये तो इशारे हैं कुदरत के मतलब आओगे
हमने गुलदान में कुछ फूल सजा रखे हैं
ये खुद-ब-खुद ही खिल जायेंगे जब आओगे
इसी उम्मीद में नींदों से किनारा किया हमने
रात के मुसाफिर हो जब होगी शब आओगे
दिल तोड़कर फिर से जोड़ा कैसे जाता है
हमें यकीन तुम दिखाने ये करतब आओगे
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