रश्मोरिवाज हमको सिखाती है दोस्ती
इंसान को इंसान बनाती है दोस्ती
अच्छा हो या बुरा हो कि अपना या गैर हो
इन सब से बड़ा मेल कराती है दोस्ती
रिश्ते भी जहां छोड़ चले अपने साथ को
उस मोड़ पर भी साथ निभाती है दोस्ती
पापा भी कभी कॉल करें मेरे वास्ते
तो झूठ भी सच बोल बचाती है दोस्ती
मम्मी के लिए दोस्त मेरे लाजवाब हैं
मेरी माँ को सबकी माँ बनाती है दोस्ती
यारों को पता है कि मेरा दिल कहाँ फ़िदा
इस बात पे भी शर्त लगाती है दोस्ती
वैसे तो मजे लूटने में छोड़ते नही
नाराज अगर हों तो मनाती है दोस्ती
जब राह में हों मुश्किलें तो टोर्च की तरह
दे रोशिनी वो राह दिखाती है दोस्ती
लड़ना जो पड़े भीड़ से तो दोस्त के लिए
कुछ सोचे बिना हाथ उठाती है दोस्ती
गमख्वार बने ढाल बने गम के सामने
तन्हाइयों में जश्न मनाती है दोस्ती
आँखों की नमी पोंछ के गालों के दरमियाँ
हलचल सी मचा जोर हँसाती है दोस्ती
ये बात सभी मानते जब यार साथ हों
तो हार में भी जीत दिलाती है दोस्ती
कविराज तरुण
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