Tuesday, 3 December 2019

नाम की तरह

आओ गुजारे शाम कभी शाम की तरह
करने हैं हमे काम सभी काम की तरह
तेरे रसूख से मेरा लड़ना फिजूल है
होने दो मेरा नाम अभी नाम की तरह

कविराज तरुण

Thursday, 7 November 2019

मार्केटिंग

मार्केटिंग

हमारी जिंदगी इतनी भी आसान नही है
ये सच है किसी का इसतरफ ध्यान नही है

खर्चों का आलम ये है कि अपनी ख्वाहिशों का गला दबा देते हैं
और ये आँसूँ हमको भी आते हैं ये अलग बात है हम छुपा लेते हैं

और जिन्हें लगता है कि हम बड़े मौज में हैं
उन्हें क्या पता हम रहते किस खोज में हैं

अंदाजा लगाना हो तो स्वागत है आपका बाज़ार मे
अच्छे अच्छो की नाँव डूब जाती है मँझधार में

लड़को पर ग़ज़ल

हमारी जिंदगी भी इतनी आसान नही है
ये सच है किसी का इसतरफ ध्यान नही है
खर्चों का आलम ये है कि अपनी ख्वाहिशों का गला दबा देते हैं
और ये आँसूँ हमको भी आते हैं ये अलग बात है हम छुपा लेते हैं
धोकेबाज़ फरेबी न जाने क्या क्या नाम मिलते हैं
दारू दवा नही है पर इसी से तो ये ज़ख्म भरते हैं
सुनो तुम भी मेरी तरह किसी के होकर जानो
ये दिल क्या है और दिल्लगी क्या चीज है
एक जमाने से लड़कर अब ये समझ मे आया
खुदखुशी क्या है और खुशी क्या चीज है

Sunday, 3 November 2019

ग़ज़ल- तुम हमारे लिए हम तुम्हारे लिए

ग़ज़ल

तुम हमारे लिए हम तुम्हारे लिए
चाँद जैसे फलक पर सितारे लिए

अश्क़ का मोल क्या उसकी कीमत है क्या
मै छलकता रहा अश्क़ सारे लिए

इसतरह हो रही है हवा गर्द सी
फूल मुरझा रहे अब्र खारे लिए

आ गए आज खुद वो मेरे सामने
लग रहा रेत आई किनारे लिए

बंदिगी में खुदा की मजा आ गया
बन गए जब खुदा तुम हमारे लिए

कविराज तरुण

Thursday, 24 October 2019

कमाल है

ख्वाबों का रंग आजकल क्यों लाल लाल है
चहरे पे तेरी ये हँसी तो बेमिसाल है

ये बेवजह दिखावटी या बात और है
अच्छा ! तुम्हे भी इश्क़ है ये तो कमाल है

कविराज तरुण

छोड़ा मुझे साहब

कुछ इसकदर उस सख्स ने तोड़ा मुझे साहब
पूछो नही किस काम का छोड़ा मुझे साहब
कश्ती भँवर के बीच मे उलझी रही मेरी
इस गर्त में क्यों खामखां मोड़ा मुझे साहब

कविराज तरुण

Wednesday, 23 October 2019

ऐतबार हो जाये

तुम किसी के घर में रहो रात पार हो जाये
तो ऐसे माहौल मे क्या कुछ सवार हो जाये
और कोई बात नही बस ज़रा सी दोस्ती है
इतना अब आसान कहाँ ऐतबार हो जाये

कविराज तरुण

बहुत पहले बहुत पहले

मुझे ये इश्क़ था शायद बहुत पहले बहुत पहले
मेरे दिल की नही थी हद बहुत पहले बहुत पहले
मगर अब हाल ये अपना पता खुद का नही मिलता
हुई ओझल मेरी सरहद बहुत पहले बहुत पहले

कविराज तरुण

Saturday, 14 September 2019

शायर

लगी जो चोट दिल पर तो बड़े घायल हुये शायर
खुशी खुद कर गये कितने दुखी पागल हुये शायर
नही इसपार कश्ती है नही उसपार माँझी है
हुई बारिश शुरू फिरसे सभी बादल हुये शायर

Tuesday, 13 August 2019

वंदे मातरम

वंदे मातरम

देश के वीर जवानों का मतवाला सा ये टोला है
काश्मीर से कन्याकुमारी हरदिल अब ये बोला है
अपना करम अपना धरम
वंदे मातरम वंदे मातरम

धारा तीन सौ सत्तर हट गई काश्मीर की घाटी से
अलख जगी है देशप्रेम की केशर की इस माटी से
उरी और फिर पुलवामा का बदला केवल झाँकी है
थोड़ा सा तुम सब्र करो अभी पिक्चर आनी बाकी है

आतंकवाद की नस्लो पर पड़ गया आग का गोला है
काश्मीर से कन्याकुमारी हरदिल अब ये बोला है
अपना करम अपना धरम
वंदे मातरम वंदे मातरम

एक नही दो बार नही तुम कितनी बारी हारे हो
इतिहास पलटकर देखो तुम बस दहशत के लश्कारे हो
हम दहशतगर्दी का ये नंगा नाच नही चलने देंगे
इस स्वर्ग-सरीखी धरती पर आतंक नही पलने देंगे

अब तेरे छदम इरादों का सब पोल हिन्द ने खोला है
काश्मीर से कन्याकुमारी हरदिल अब ये बोला है
अपना करम अपना धरम
वंदे मातरम वंदे मातरम

कविराज तरुण

Wednesday, 7 August 2019

कतअ 16

तेरी गलियों से गुजरे ज़माना हुआ
इश्क़ तो न हुआ पर फसाना हुआ
'तुमसे बेहतर मिलेगी' -कहा आपने
वाह बहुत खूब ! ये भी बहाना हुआ

Monday, 5 August 2019

कतअ 15

तुम्ही दिन के उजाले में अँधेरी रात करते हो
खिली सी धूप है फिरभी यहाँ बरसात करते हो
मुझे बिल्कुल नही जँचता तेरा अंदाज सच में ये
किसी से भी बयाँ दिल के सभी जज़्बात करते हो

कतअ 14

मेरी उम्मीदों को कुछ तो हौसला दे दो
मेरे हक में भी कभी कोई फैसला दे दो
मै आज़ाद पंक्षी हूँ मगर अब थक चुका हूँ मै
तुम अपने दिल मे छोटा सा मगर एक घोंसला दे दो

Tuesday, 23 July 2019

कतअ 13

221 2121 1221 212

दिल खोल करके आप मुलाकात कीजिये
जो हो सके तो आज सनम बात कीजिये

कहने को और भी हैं कई ख़्वाब दूसरे
मेरी निगाह में भी कभी रात कीजिये