Friday, 30 May 2014

पापा

ऊँगली पकड़कर चलना सीखा
विपदाओं से लड़ना सीखा
पापा की राहों पर कदम बढ़ाकर
मैंने शिखर पर चढ़ना सीखा
आदर्श मेरे बस आप ही हो
खुशियों का स्रोत सदा बस आप ही हो
आप की छाया सदा रहे बस
फूल सा मैंने खिलना सीखा
नमन आपको पापा मेरे
भगवान से बढ़कर पापा मेरे
भवबाधा से मैंने उबरना सीखा
जीवन में कुछ करना सीखा
उंगली पकड़कर चलना सीखा

--- कविराज तरुण

3 comments:

  1. धन्यवाद राकेश जी

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  2. धन्यवाद राकेश जी

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