Saturday, 18 October 2014

राजभाषा हिन्दी

राजभाषा हिन्दी

उठो , जागो ... निज भाषा को अपना लो |
हिन्दी बुला रही है ... ऐ हिन्दुस्तानी लाज बचा लो ||
मै पुरखों की अतुल्य धरोहर ...
और संस्कृत की बेटी हूँ |
सिंहासन पर मै पली – बढ़ी ...
पर आज चिता पर लेटी हूँ |
सहज , सरस और सरल सा ...
मेरा ये इतिहास बड़ा |
काश मुझे आकार कर दे तू ...
अपने इन पैरों पर फिरसे खड़ा |
विस्मित माँ की आँखों से ... आँसू की हर बूँद हटा लो |
हिन्दी बुला रही है ... ऐ हिन्दुस्तानी लाज बचा लो ||

--- कविराज तरुण

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - सोमवार- 20/10/2014 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 37
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

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