टूटी है इस मन की आशा
रात कालिमा लेकर आई
गहरी काजल सी परछाई
पर अब दूर अंधेरा होगा
जागो! तभी सबेरा होगा
तुम दीपक सा जलने वाले
तुमसे ही उत्पन्न उजाले
तुम चमके तो जग है चमका
तुम दमके तो सूरज दमका
किरणों का फिर डेरा होगा
जागो! तभी सबेरा होगा
पर उपदेश कुशल बहु तेरे
पर्वत को जब बादल घेरे
तब आँखों में स्वप्न सजाये
पुंज कोई पर्वत पर आये
उसने चित्र उकेरा होगा
जागो! तभी सबेरा होगा
नयनों में ही विरहा बीते
आंसूँ का जल पीते पीते
निज को हमने नही संवारा
तो फिर अम्बर का ये तारा
ना मेरा ना तेरा होगा
जागो! तभी सबेरा होगा
उत्तर क्या दें प्रश्न अधूरा
जीवन जैसे भाँग धतूरा
खाये तो बौराना तय है
या मरने का मन में भय है
ऐसे नही बसेरा होगा
जागो! तभी सबेरा होगा