जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए
जो हमारी जान लेने पर उतारू नीति है
उस नीति का पुरजोर से प्रतिकार होना चाहिए
क्या कहा हमसे नही अब फर्क तुमको पड़ रहा
क्या कहा ये बैंक वाला फालतू में लड़ रहा
क्या कहा हमने नही कुछ भी दिया है देश को
क्या कहा हम लोग केवल आ रहे उपदेश को
तो तुम्हारी सोच को धिक्कार होना चाहिए
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए
तुम नही आओगे तो फिर कौन आयेगा यहाँ
बात मन की सामने फिर कौन लायेगा यहाँ
तुम नही बोलोगे तो आवाज़ कैसे आयेगी
पांच दिन की बैंकिंग कैसे भला मिल पायेगी
आवाज़ दो हम एक हैं यलगार होना चाहिए
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए
हम सदा जनतंत्र की सेवा समर्पण में रहे
नोटबंदी जब हुई तो हम प्रबंधन में रहे
हम खुशी से कर्म को अपने निभाते ही रहे
परिवार को भी भूलकर जन धन सजाते ही रहे
अब बैंक कर्मी का सुखी परिवार होना चाहिए
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए
पांच दिन की बैंकिंग स्वीकार होना चाहिए
जो हुआ पहले नही इस बार होना चाहिए
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