Saturday, 30 April 2016

लखनवी पहचान

बड़ी अदब से आदाब करना
नज़ाकत से हर ख्वाब भरना
लफ्ज़ सलीखे की उर्दू ज़ुबानी
है शराफ़त की जिसमे निशानी
ये शहर ज़नाब तहजीबो का है
इसका हर रिवाज़ तमीजों का है
इसकी विरासत मे मोहब्बत पनहगार है
आज़ादी की जंग में ये मददगार है
सहेज़ रखा है इसने कला का खज़ाना
लज़ीज़ है यहाँ की हर थाली का खाना
राजनीति ने सदा इसको दिल मे बसाया
अटल राज से लेकर यादव की माया
शुकून का आलम है उम्मीदों का असर है
हर मज़हब साथ चलते हैं ऐसा शहर है
रुपहले पर्दे ने नवाज़ी है इसकी फिदरत
इसकी मिट्टी से है हर शायरी को मोहब्बत
नवाबो की शानोशौकत उमराव की जान
लखनऊ है सभ्यता की अज़ब पहचान

कविराज तरुण

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