Saturday, 17 June 2017

ग़ज़ल - असर

ग़ज़ल - असर
रदीफ़ - बाखुदा
काफ़िया - अर
122 122 122 12

हुआ प्यार का यूँ असर बाखुदा ।
नही कुछ भी' आता नज़र बाखुदा ।।

इशारे मिले दिल मुबारक हुआ ।
नया सा लगे अब शहर बाखुदा ।।

कदम दर कदम पास आते गये ।
मिला इक हसीं फिर सफर बाखुदा ।।

इनायत हुई जो मुहब्बत हुई ।
लदा गुल से' मेरा शज़र बाखुदा ।।

बरसने लगे लफ़्ज़ कुछ इसतरह ।
ग़ज़ल की मुकम्मल बहर बाखुदा ।।

अजब हुस्न है रौशिनी सी फ़िज़ा ।
'तरुण' थाम ले ये पहर बाखुदा ।।

*कविराज तरुण सक्षम*
*साहित्य संगम संस्थान*

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